व्यक्तिगत स्टाफ की जानकारी मांगी गई
बताया गया कि कई अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर दूसरे बोर्ड कारपोरेशन में भेजा गया था।सप्ताह भर पहले सभी विभागों से पूर्व सरकार की ओर से कंट्रैक्ट और व्यक्तिगत स्टाफ की जानकारी मांगी गई थी। उनको मूल विभाग में लौटने को कहा गया है।
पदभार संभालते ही क्या बोलीं रेखा गुप्ता
सीएम रेखा गुप्ता से मिलने पहुंचे मुख्य सचिव धर्मेंद्र
अलग से लगाई गई आतिशी की कुर्सी हटी
जेल से लौटने के बाद अरविंद केजरीवाल ने जब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था और आतिशी को मुख्यमंत्री बनाया गया था। तब सीएम की जिस कुर्सी पर केजरीवाल बैठते थे, उसको आतिशी ने खाली छोड़ दिया था और अपने लिए अलग कुर्सी कार्यालय में लगवाई थी, जिस पर वह बैठती थीं। अलग से लगाई गई इस कुर्सी को अब हटा दिया गया है। सीएम की जिस कुर्सी पर केजरीवाल बैठते थे, उसी को नई सीएम रेखा गुप्ता ने ग्रहण किया।
सादगी से संभाला प्रभार
लंबे समय बाद नई सरकार के आने पर सचिवालय में न तो अतिरिक्त रोशनी की व्यवस्था की गई, न ही सचिवालय को फूलों से सजाया गया। बुधवार की शाम इस बारे में निर्देश आते ही सचिवालय को सजाया जाना टाल दिया गया था। नई सरकार ने अतिरिक्त साज-सज्जा से इन्कार कर दिया था।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बृहस्पतिवार को सचिवालय में पदभार संभाला। इस दौरान कैबिनेट मंत्रियों के अलावा वीरेंद्र सचदेवा, बैजयंत जय पांडा, हर्ष मल्होत्रा, बांसुरी स्वराज, योगेंद्र चांदोलिया,रामवीर सिंह बिधूड़ी भी उपस्थित रहे l
केजरीवाल ने अनाप-शनाप पैसा खर्च किया: आशीष सूद
मुख्यमंत्री कार्यालय में पहुंचे दिल्ली की नई सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह और आशीष सूद ने वहां की भव्यता देखकर कहा कि जिस तरह से अरविंद केजरीवाल ने अपने आवास पर गलत तरीके से अनाप-शनाप पैसा खर्च किया, ठीक उसी तरह अपने कार्यालय को बनाने में भी खर्च किया है।उन्होंने कहा कि कार्यालय देखकर ऐसा लग रहा है, मानो की जैसे किसी मुख्यमंत्री का कार्यालय नहीं बल्कि किसी बड़े कारपोरेट हाउस के मालिक का दफ्तर हो।
बता दें कि दिल्ली सचिवालय में स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय सहित प्रमुख कैबिनेट मंत्रियों के कार्यालय के नवीनीकरण का काम कुछ साल पहले शुरू किया गया था, जो अब लगभग पूरा होने वाला है। जिसमें मुख्यमंत्री कार्यालय का कुछ कार्य शेष भी रह गया है। इस योजना पर करीब 38 करोड़ रुपये खर्च किए गए। हालांकि इस कार्य पर पहले कभी विवाद नहीं रहा।
