बढ़ती महंगाई का असर किचन पर गहराता दिख रहा है। सब कुछ तो महंगा है ही लेकिन अब रोटी को भी महंगाई की नजर लग गई है। गेहूं का रेट इतना बढ़ता जा रहा है कि गरीब के लिए दो जून की रोटी भी मुश्किल होती जा रही है। आटा महंगा हो गया है। इधर, गेहूं के मूल्य में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
32 से 40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा आटा
इन दिनों गेहूं 2500-2600 रुपये प्रति कुंतल पहुंच गया है। पांच महीने पहले यह 2000-2100 रुपये था। जबकि मई माह में गेहूं का दाम 2200 रुपये हो गया। जून में 2300, जुलाई महीने में 2400 रुपये प्रति कुंतल था। गेहूं की कीमत बढ़ने से आटे की कीमत में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। अब आटे का दाम 28 से 30 रुपये किलो हो गया है। जबकि मई माह में आटा 24 रुपये प्रति किलो, जून में 25 रुपये, जुलाई में 26 रुपये किलो था। मौजूदा समय में सामान्य तौर पर खुला आटा 28 से 30 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है जबकि ब्रांडेड कंपनियों का पैक्ड आटा 32 से 40 रुपये तक प्रति किलो की दर से बिक रहा है।
पिछले साल गेहूं की पैदावार कम होना है इसका कारण
आटे की लगातार बढ़ी कीमतों के कारण महंगाई से परेशान लोगों का रसोई का खर्च और अधिक बढ़ गया है। सबसे अधिक परेशानी गरीब व मध्यम वर्ग के लोगों को उठानी पड़ रही है। लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर किस तरह से महंगाई में घर परिवार की गाड़ी चलाई जा सके। प्रतापगढ़ शहर के गेहूं कारोबारी बब्बू का कहना है कि पिछले साल गेहूं की पैदावार कम होने से इसके दाम में बढ़ोतरी हुई है।
जानिए क्या बोले लोग
सब्जी, दाल, चावल, दूध के बाद आटा भी महंगा हो गया है, ऐसे में आम आदमी के सामने पेट भरने की मुश्किल हो रही है। आटा ज्यादा महंगा होने पर गरीब आदमी के लिए कठिनाई हो रही है।
-जेपी तिवारी, कालिंदीपुरम कालोनी, प्रयागराज
गेहूं का महंगा है वह तो है ही, लेकिन आटे का दाम इससे भी अधिक है। इससे रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
– रंजन यादव, रायपुर भाटी कुंडा, प्रतापगढ़
बाजार में गेहूं के अलावा चावल के भी दाम बढ़े हैं। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। चावल का अधिक इस्तेमाल हो रहा है।
– जैश बहादुर सिंह, राजमतीपुर लालगंज, प्रतापगढ़
आटे की जरूरत हर परिवार को पड़ती है। गेहूं महंगा होने से सीधा असर घर की रसोई पर पड़ रहा है। कैसे खर्च चले, तनाव है।
