देहरादून।उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को गैस आधारित बिजली प्रोजेक्ट के अलावा केन्द्रांश से भी बिजली मिलती है, तब जाकर राज्य कुल डिमांड के करीब पहुंच पा रहा है. खास बात यह है कि इसके बाद भी बिजली की कमी को पूरा नहीं किया जा पा रहा है. ऐसे में खुले बाजार से हर दिन बिजली खरीदी जा रही है. खास बात ये है कि फिलहाल केंद्र सरकार से राज्य को जितना कोटा है, उससे भी 300 मेगावाट बिजली ज्यादा मिल रही है. 30 सितंबर तक ही केंद्र यह अतिरिक्त कोटा राज्य को देगा. ऐसे में 30 सितंबर के बाद यदि केंद्र से अतिरिक्त कोटा नहीं मिला तो बिजली का संकट और भी ज्यादा गहराने लगेगा. हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पिछले दिनों केंद्रीय मंत्रियों से मिलकर राज्य कअतिरिक्त कोटा दिए जाने की पैरवी कर चुके हैं. ऊर्जा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम भी बिजली की कमी को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करने की बात कह रहे हैं।
उत्तराखंड में बिजली उत्पादन की कमी और बढ़ती डिमांड के बीच बिजली संकट का खतरा भी बढ़ता जा रहा है. हालांकि विद्युत की कमी के हालात उत्तराखंड ही नहीं बल्कि राष्ट्रव्यापी दिखाई देते हैं, लेकिन ऊर्जा प्रदेश कहे जाने वाले उत्तराखंड में यह समस्या बिजली कटौती की तरफ बढ़ रही है. चिंता की बात यह है कि एक तरफ ऊर्जा निगम कंगाली के दौर से गुजर रहा है, तो दूसरी तरफ निगम करोड़ों की बिजली बाजार से खरीदने को भी मजबूर है.
