आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू की गिरफ्तारी से सियासी भूचाल आ गया है। सड़कों पर TDP के कार्यकर्ता जमकर विरोध प्रदर्शन कर रहे है। बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी 350 करोड़ रुपये के राज्य कौशल विकास निगम (APSSDC) घोटाले को लेकर ही हुई है। बता दें कि टीडीपी के कई नेताओं को भी नजरबंद कर दिया गया है।
इन धाराओं के तहत हुई गिरफ्तारी
नायडू को IPC की प्रासंगिक धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है, जिसमें धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति की डिलीवरी के लिए प्रेरित करना) और 465 (जालसाजी) शामिल हैं। इसके अलावा एपी CID ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम भी लगाया है।
क्या है कौशल विकास निगम घोटाला?
आंध्र प्रदेश पुलिस के अपराध जांच विभाग ने इसी साल मार्च में, राज्य कौशल विकास निगम में लगभग 3, 300 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच शुरू की। इसकी जांच भारतीय रेलवे यातायात सेवा (IRTS) के पूर्व अधिकारी अरजा श्रीकांत को जारी किए गए नोटिस के बाद शुरू की गई। बता दें कि अरजा श्रीकांत 2016 में एपीएसएसडीसी के सीईओ थे। टीडीपी सरकार के कार्यकाल (2016) के दौरान, बेरोजगार युवाओं को उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए कौशल प्रशिक्षण प्रदान करके सशक्त बनाने के उद्देश्य से एपीएसएसडीसी की स्थापना की गई थी।
इस योजना के तहत उद्योगों में काम करने के लिए युवाओं को जरूरी कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाना था। इसकी जिम्मेदारी एक कंपनी Siemens को सौंपी गई। इस योजना के लिए कुल 3300 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे और तत्कालीन नायडू सरकार ने ऐलान किया था कि राज्य सरकार इसके लिए कुल 370 करोड़ रुपये खर्च करेगी। बाकी के 90 प्रतिशत खर्च कौशल विकास प्रशिक्षण देने वाली कंपनी सीमेन्स करेगी। आरोप है कि नायडू सरकार ने योजना में किए जाने वाली रकम 371 करोड़ रुपये शैल कंपनियों को ट्रांसफर कर दिया। साथ ही पैसे ट्रांसफर करने से संबधित सभी डॉक्यूमेंट्स को भी नष्ट कर दिया गया।
CID की प्रारंभिक जांच में हुए बड़े खुलासे:
टीडीपी सरकार ने 3,300 करोड़ रुपये की एक परियोजना के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे।
इस समझौता ज्ञापन में सीमेंस इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर इंडिया लिमिटेड और डिजाइन टेक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां शामिल थी। सीमेंस इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर इंडिया को कौशल विकास के लिए 6 उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने का काम सौंपा गया था। राज्य सरकार को कुल परियोजना लागत का लगभग 10% योगदान देना था, जबकि सीमेंस और डिजाइन टेक बाकी धनराशि मदद के रूप में प्रदान करेंगी।
