PF से पैसा निकालना हुआ आसान, बस कुछ ही स्टेप्स करने होंगे फॉलो

PF से पैसा निकालना हुआ आसान, बस कुछ ही स्टेप्स करने होंगे फॉलो
नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) से जुड़े निजी क्षेत्र के कर्मियों के ईपीएफ खाते की दावेदारी (क्लेम सेटलमेंट) को सहज बनाने के लिए आधार को ही सत्यापन का सबसे प्रामाणिक और सर्वमान्य दस्तावेज बनाए जाने की तैयारी है। इपीएफ दावे से जुड़े दस्तावेजों में विसंगतियों के कारण बड़ी संख्या में लंबित रहने वाले दावों का समाधान निकालने के लिए आधार को सत्यापन का प्रमुख दस्तावेज बनाया जाएगा।
श्रम मंत्रालय ने भुगतान के दावे का निपटान करने की प्रक्रिया में दस्तावेजों की जटिलताएं खत्म करने के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को आधार को ही पहचान संबंधी दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने को कहा है। श्रम मंत्रालय को उम्मीद है कि इससे ईपीएफ खाताधारकों के दावों को
न केवल सहूलियत होगी बल्कि दावों के निपटारों की प्रक्रिया में लगने वाला समय भी घटेगा।
ईपीएफ दावों के निपटान में देरी को घटाने के लिए श्रम मंत्रालय ने किसी आवेदन के 30 दिन से अधिक लंबित होते ही उसे स्वत: संगठन के फास्ट ट्रैक प्रक्रिया में लाने की प्रक्रिया भी शुरू करने को कहा है।

सरकार का दावों का निपटारा जल्दी करने पर जोर

केंद्रीय श्रम और रोजगार सचिव सुमिता डावरा ने देश भर में ईपीएफओ के 21 क्षेत्रीय कार्यालयों के कामकाज की समीक्षा बैठक में दावों के निपटारे में प्रामाणिक दस्तावेजों को लेकर होने वाली देरी खत्म करने के लिए आधार पर जोर दिया। सचिव ने कहा कि आधार का पहचान संबंधी दस्तावेज के रूप में उपयोग सरकारी वितरण की प्रक्रियाओं को सरल बनाता है। साथ ही पारदर्शिता एवं दक्षता को बढ़ाते हुए यह भी सुनिश्चित करता है कि लाभार्थियों को उनके अधिकार निर्बाध रूप से प्राप्त हों।

सचिव के मुताबिक, आधार-आधारित सत्यापन से ईपीएफ कर्मचारियों को दावों के निपटान के लिए अपनी पहचान साबित करने के लिए कई अन्य दस्तावेज तैयार करने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। इसी लिहाज से ईपीएफ से जुड़ने वाले नए सदस्यों को यूएएन नंबर देते समय ही उसे आधार से जोड़ा जाए।

ईपीएफ शिकायत निवारण तंत्र में सुधार से लेकर सदस्यों के प्रोफाइल में मौजूद त्रुटियों, नियोक्ताओं के गैर-अनुपालन, तकनीकी गड़बडि़यों आदि के कारण दावों के निपटारे में देरी जैसी शिकायतों के समाधान रणनीति पर भी बैठक में चर्चा हुई। श्रम मंत्रालय ने इसी दौरान दावों के निपटारे में सुधार के साथ-साथ अस्वीकृति की दरों में कमी लाने का लक्ष्य ईपीएफओ को दिया।

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